Baavre Nayan
तङपू हर पल रात बिताऊं नयनन से मैं रोता जाऊं,
बिरही रुत यह रात बिताये सावन सजना भीगे जाऊं,
काहे मैं रोऊं अब बिन तेरे झर झर माही मरता जाऊं,
नयनन से मैं रोता जाऊं.
तङप लगन बन आग सतावे सजणा मैं भी मरता जाऊं,
बन जल बूंदे बरस ज़रा लगन मैं हीरे जलता जाऊं,
कुछ अब कहते हीर तुझे,
इक मैं पगला राँझा कहलाऊं,
नयनन से मैं रोता जाऊं.
लफ्ज़ा णे पढना जाणे है तो काहे ना पढती अँखियन तू मेरी,
अँखियन भी करती बातें हैं अँखियन से मैं लिखता जाऊं,
पढ भी ले तू हीरे राँझें नू इन्तज़ार में जान गंवाऊं,
नयनन से मैं रोता जाऊं,
नयनन से मैं रोता जाऊं.
Shani
shani_writes@rediffmail.com


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