
क़ैसे मैं दूँ खुद को य़हां ज़रा बोल दे मेरे मन,
है नहीं हरसू यहां ना तेरा ना मेरा मन,
वक्त्त की रेत पे हर बात ही मिट जात्ती है,
दे दे उसे अब रूह खुद की दे दे तू समर्पण,
मन मेरे मन,
समर्पण.
देखते है सब सडको पे चलते हुए कपडे हज़ार,
बदलते है खुद की रूह को कहते है मेरा मन,
मन मेरे तू तेरे यार के लिए तो ज़िंदा रहना,
क़रने दे ज़िंदगी को उनकी जो करते है खुदको कफन,
जा बदल रूह खुद की दे दे तू समर्पण,
मन मेरे मन,
समर्पण.
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समर्पण.
मेरे संग चल मैं तुझे साँसो से छूना चाहता हूँ,
घुटती है खुद मैं रह के अब मैं तेरे साथ चलना चाहता हूँ,
देख बङा मुश्किल है यहां दुनिया मैं मन लगाना,
मैं तेरे साथ मन लगाना चाहता हूँ,
थोङा समर्पण लेना तो थोङा समर्पण देना चाहता हूँ.
हाँ मेरा माँगना मुझ मुरीद के आँसू सही,
अब मैं आँखे झुकाए तुझसे तेरा सब माँगना चाहता हूँ,
दे मुझे तु अक्स खुदका दे मुझे तू रूह भी,
ज़िंदगी के बाद मैं भी तसल्ली से मरना चाहता हूँ,
थोङा समर्पण लेना तो थोङा समर्पण देना चाहता हूँ.
बंद आँखो से तुझे देखूंगा यह वादा करता हूँ तुझसे,
अब तो मौत के बाद भी मैं तुझे देख्नना चाहता हूँ,
देख रूमानी बातें होती नहीं हूँ मैं थोङा चुपचाप ही,
अब मैं हर लफ्ज़ अपने ज़ोर से लिख्नना चाहता हूँ,
थोङा समर्पण लेना तो थोङा समर्पण देना चाहता हूँ.
चल चलते है मंज़िल को कोई राह ज़रूर पांएगे,
इस तरह तन्हा अकेला ना मै भटकना चाहता हूँ,
कर मेरी अधूरी रूह को चल के संग मेरे पूरा भी,
मैं अधूरे रस्तो पे अब ना अकेला जाना चाहता हूँ,
थोङा समर्पण लेना तो थोङा समर्पण देना चाहता हूँ.
मंज़िल को संग तेरे बस तेरे साथ पाना चाह्ता हूँ,
थोङा समर्पण लेना तो थोङा समर्पण देना चाहता हूँ.
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Commitment.

Meri Bhaavnaayen Hi Mujhe Insaa Banati Hai, Kahin Bachpan Main Hi Us Khwaab Ki Tasveer Ban Chuki Thi, Jis Ke Saath Mujhe Meri Zindagi Bitaani Thi, Jaanta Tha Main Behti Ret Main Chehra Uska Bana Raha Hun Jo Saaf Nahi Par Mera Vishwaas Zaroor Tha Ki Jabb Main Kabhi Bada Ho Jaunga, Mera Wo Sapna Mere Saamne Hoga, Jiski Gaud Main Let Ke Main Apne Saare Gham Bhool Jaun, Jis Se Meri Khamoshi Baat Kare, Uski Aankhon Main Main Meri Duniya Dekhu, Yeh Mera Sapan Tha Yahi Mera Samarpan, Naa Jaane Is Samarpan Ka Koi Ant Bhi Hai Ya Aaj Bhi Main Meri Bachpan Ki Kalpana Ki Tasveer Ko Kisi Samudra Ki Ret Pe Gade Jaa Raha Hun.
Yeh Koi Kalpana Nahi Meri Mera Mann Hai, Maanta Hun Harr Shaks Kuch Mere Jaisa Hi Hai,Wo Kisi Khaas Chehre Ki Tasveer Bahut Pehle Hi Apne Mann Main Basa Leta Hai, Bada Bhola Hai Mann Jaanta Nahi Ki Saagar Ke Seene Pe Bani Tasveeri Sachhi Nahi Hoti, Par Bhala Is Mann Ka Kya Kare Yeh Bechara Aasha Hi Nahi Chodta, Banaane Do Isko Tasveere Aane Waale Pal Ki Jo Na Jaane Kitni Sachhi Hai Kitni Jhoothi.
Yahi To Mann Ke Khwaab Hai, Bhale Paa Na Saku Us Khwaab Ko Par Jo Sochta Hun Zara Us Khwaab Ko To Likh Dun
Shani
shani_writes@rediffmail.com


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